न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले और दागी ठेकेदार रिशु श्री से कथित सांठगांठ के मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी योगेश कुमार सागर और अभिलाषा शर्मा की कानूनी मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। विशेष सतर्कता इकाई (SVU) ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज करने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी है।
जांच एजेंसी को इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कई अहम दस्तावेज और सबूत हाथ लगे हैं, जिसके आधार पर निगरानी विभाग से दिशा-निर्देश मांगा गया है। मामले को कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) से भी राय ली जा रही है।
सहरसा नगर निगम में विजिलेंस की छापेमारी, खंगाले गए टेंडर के रिकॉर्ड
मामले की कड़ियां जोड़ने के लिए SVU की एक विशेष टीम एसपी स्तर के अधिकारी की अगुवाई में सहरसा पहुंची। टीम ने वहां के नगर निगम दफ्तर में डेरा डालकर पूर्व में आवंटित किए गए टेंडरों से जुड़ी फाइलों को खंगाला और वहां तैनात अधिकारियों से सवाल-जवाब किए। इस छानबीन के दौरान टीम के हाथ कुछ बेहद संवेदनशील दस्तावेज लगे हैं, जिन्हें आने वाले समय में कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया जाएगा।
ED की रडार पर 15 संदिग्ध फर्में, बुडको से मिले थे सबसे ज्यादा ठेके
इस पूरे नेक्सस की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ऐसी 15 कंपनियों को चिन्हित किया है, जिन्हें नियमों को ताक पर रखकर सरकारी प्रोजेक्ट्स दिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकांश ठेके बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (BUDCO), जल संसाधन विभाग और भवन निर्माण विभाग द्वारा बांटे गए थे।
केंद्रीय एजेंसी ने पिछले साल जून 2025 में ही नगर विकास एवं आवास विभाग से इन संदिग्ध कंपनियों की कुंडली मांगी थी। शुरुआती तफ्तीश में सामने आया है कि ‘रिलायबल एंटरप्राइजेज’ और ‘रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ जैसी कंपनियों के तार सीधे तौर पर रिशु श्री से जुड़े हैं।
ब्लैकलिस्टेड होने के बाद भी मिला करोड़ों का काम, नए प्रोजेक्ट्स पर लगी रोक
जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि कई कंपनियों को अयोग्य या ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद करोड़ों रुपये के ठेके सौंप दिए गए। अब इन कंपनियों के मालिकाना हक, बैंक ट्रांजैक्शंस और टेंडर हासिल करने के तौर-तरीकों की बारीकी से स्क्रूटनी की जा रही है। एहतियात के तौर पर फिलहाल इन कंपनियों को दिए गए नए कामों पर रोक लगा दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि कागजातों के पूरी तरह वैरिफाई होने के बाद इस स्कैम में कुछ और रसूखदार नाम सामने आ सकते हैं।
