न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना – मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में बुधवार को कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में बिजली उपभोक्ताओं की सुविधाओं के विस्तार, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य सहायता योजनाओं के दायरे में वृद्धि तथा महिला एवं बाल विकास विभाग में रिक्त पदों को भरने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से आम जनता को बेहतर सेवाएं मिलने के साथ-साथ रोजगार और विकास को भी नई गति मिलेगी।
हाईलाइट्स –
- बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए नए फोरम और 4 पदों का सृजन।
- मधुबनी में 83.25 करोड़ रुपये के निजी निवेश से 50 हजार मीट्रिक टन क्षमता का अनाज साइलो बनेगा।
- मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष की आय सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर 4 लाख रुपये वार्षिक की गई।
- सीडीपीओ के रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती नियमों में विशेष शिथिलता को मंजूरी।
बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों का होगा त्वरित निपटारा
राज्य के बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों के शीघ्र समाधान के लिए नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड में द्वि-स्तरीय उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम के गठन को मंजूरी दी गई। फोरम के संचालन के लिए मुख्य अभियंता के दो नए पद तथा विद्युत अधीक्षण अभियंता के दो नए पद सृजित किए जाएंगे। ये सभी पद बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड की दोनों वितरण कंपनियों के अंतर्गत होंगे। सरकार का मानना है कि नए पदों के सृजन से उपभोक्ताओं की शिकायतों की सुनवाई और निपटारा पहले की तुलना में अधिक प्रभावी एवं तेज गति से किया जा सकेगा।
मधुबनी में 83 करोड़ की साइलो परियोजना को मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने मेसर्स लीप एग्री लॉजिस्टिक (मधुबनी) प्राइवेट लिमिटेड को मधुबनी जिले के राजनगर रेलवे स्टेशन के समीप सोनवारी-परिहारपुर क्षेत्र में 50 हजार मीट्रिक टन क्षमता के आधुनिक अनाज भंडारण साइलो के निर्माण की स्वीकृति दी है। इस परियोजना में 83 करोड़ 25 लाख रुपये का निजी निवेश किया जाएगा। बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली-2016 के तहत दी गई इस मंजूरी से राज्य में आधुनिक भंडारण सुविधाओं का विस्तार होगा। साथ ही लगभग 109 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
चिकित्सा सहायता और सीडीपीओ भर्ती में बड़ा बदलाव
बैठक में मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष के लाभार्थियों के लिए वार्षिक आय सीमा को 2.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये प्रतिवर्ष करने का निर्णय लिया गया। इससे अधिक संख्या में जरूरतमंद और मध्यम आय वर्ग के मरीजों को इलाज के लिए आर्थिक सहायता मिल सकेगी। इसके अलावा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) के रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती नियमों में एक बार के लिए शिथिलता प्रदान की गई है। नियमित महिला पर्यवेक्षिकाओं की कमी के कारण पदोन्नति कोटे के पद खाली रह रहे थे। अब निर्धारित 25 प्रतिशत पदों को भी बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से सीधी भर्ती द्वारा भरा जा सकेगा, जिससे आईसीडीएस योजनाओं के संचालन और निगरानी को मजबूती मिलेगी।
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