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फरक्का जल संधि के नवीनीकरण पर संजय झा का बड़ा बयान, बोले- बिहार के…



जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि में बिहार के हितों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी गई। 




संजय झा , राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेडीयू

न्यूज 11 भारत/बिहार डेस्क
पूजा शर्मा/पटना:
पटना स्थित जेडीयू प्रदेश कार्यालय में फरक्का जल संधि को लेकर आयोजित ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा सहित जेडीयू के कई कार्यकर्ता शामिल हुए। संजय झा ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि में बिहार के हितों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि बिहार के साथ जल संसाधनों के बंटवारे को लेकर लंबे समय से अन्याय हो रहा है और अब राज्य के हितों की मजबूती से पैरवी करने की जरूरत है।

संजय झा ने कहा कि वर्ष 1996 में हुई संधि के तहत जनवरी से 31 मई तक बांग्लादेश को 1500 क्यूमेक पानी देने का प्रावधान है। उनके अनुसार, इस अवधि में बिहार पहुंचने वाली गंगा में करीब 400 क्यूमेक पानी ही उपलब्ध रहता है। उन्होंने सवाल उठाया कि शेष पानी की व्यवस्था कैसे होती है, जबकि सोन, गंडक, बागमती और कोसी जैसी नदियों का पानी भी गंगा में आकर मिलता है। उनका कहना था कि इससे बिहार की सिंचाई और पेयजल संबंधी जरूरतों पर असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि 12 दिसंबर 2026 को संधि की अवधि समाप्त होने के मद्देनजर इसका नवीनीकरण नहीं किया जाना चाहिए। संजय झा ने कहा कि बिहार के जल संसाधन विभाग ने पहले भी राज्य के हितों से जुड़े सवाल उठाए थे, लेकिन उस समय इन चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संधियों में राज्यों की प्रत्यक्ष भूमिका भले सीमित हो, लेकिन संधि तैयार करते समय संबंधित राज्य के हितों को ध्यान में रखना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।

जेडीयू नेता ने बिहार के औद्योगिक विकास का मुद्दा उठाते हुए कहा कि फ्रेट इक्वलाइजेशन नीति के कारण बिहार के खनिज संसाधनों का लाभ दूसरे राज्यों में उद्योगों की स्थापना के रूप में मिला, जबकि बिहार में अपेक्षित औद्योगिक विकास नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2000 में झारखंड बिहार से अलग हुआ, तब राज्य के खनिज संसाधनों का बड़ा हिस्सा झारखंड में रह गया। संजय झा ने कहा कि यदि नीतीश कुमार को संयुक्त बिहार के विकास का अवसर मिलता, तो राज्य में औद्योगिक विकास की तस्वीर अलग हो सकती थी।

संजय झा ने फरक्का बैराज और गंगा में गाद जमा होने के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि गंगा की जलधारण क्षमता कम होने से बाढ़ की समस्या गंभीर होती है। उनके अनुसार, एक ओर बाढ़ के दौरान बिहार को नुकसान उठाना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर जरूरत के समय राज्य को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने जल बंटवारे में बिहार के हितों को ध्यान में रखने की मांग की।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार ने गंगा का पानी गया, बोधगया, नवादा और राजगीर जैसे शहरों तक पहुंचाने की व्यवस्था की है। लेकिन संजय झा के मुताबिक, फरक्का जल संधि के कारण जनवरी से मई के बीच गंगा से पानी लेने में सीमाएं सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि संधि के नवीनीकरण पर फैसला लेते समय बिहार की पेयजल और सिंचाई संबंधी जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

संजय झा ने कहा कि उन्होंने पिछले मानसून सत्र में राज्यसभा में भी यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार के जल संसाधनों और आर्थिक हितों से जुड़े सवालों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने की जरूरत है, ताकि राज्य को उसके संसाधनों का उचित लाभ मिल सके।

वही संजय झा ने कहा कि नीतीश कुमार के कारण ही पार्टी की पहचान है। इसलिए हमने इस कार्यक्रम का नाम नीतीश संवाद रखा है। आगे जेडीयू में जो भी कार्यक्रम होगा उसका नाम नीतीश कुमार के नाम से होगा। 

वही 8 सीटो पर हो रहे एमएलसी चुनाव को लेकर संजय झा ने अपने सभी 8 प्रत्याशियों को जिताने के लिए कार्यकर्ताओं से अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे स्नातक प्रत्याशी नीरज कुमार और शिक्षक प्रत्याशी नवल किशोर यादव को आपलोग जिताए। 

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