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छात्रों का ऑनलाइन डेटा अपडेट न करने पर नपे 315 स्कूल, जानें शिक्षा विभाग ने क्या लिया ऐक्शन


न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार के औरंगाबाद जिले में सरकारी आदेशों की अनदेखी और विभागीय कार्यों में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। जिले के प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा-एक के छात्रों के नामांकन की जानकारी ‘ई-शिक्षाकोष’ पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज नहीं करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय ने तत्परता दिखाते हुए 54 स्कूलों के प्रधान शिक्षकों और प्रभारी प्रधानाध्यापकों का तीन दिनों का वेतन काटने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही, बेहद धीमी गति से काम करने वाले 261 अन्य विद्यालयों के हेडमास्टरों से दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण (शो-कॉज) मांगा गया है।

समीक्षा बैठक में खुली पोल, असंतोषजनक मिली जिले की प्रगति

इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की नींव 9 जून को हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पड़ी। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने जब ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर कक्षा-एक के छात्र-छात्राओं के डिजिटल क्रेडेंशियल और एंट्री की जांच की, तो औरंगाबाद जिले का प्रदर्शन बेहद खराब पाया गया। आला अधिकारियों द्वारा बार-बार दिए गए दिशा-निर्देशों के बाद भी जमीनी स्तर पर स्कूलों ने बच्चों का डेटा ऑनलाइन अपलोड करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी, जिसे विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया।

शून्य एंट्री वाले 54 स्कूलों पर गिरी गाज, मिला अल्टीमेटम

विभागीय छानबीन के दौरान औरंगाबाद, देव, बारूण, दाउदनगर, गोह, हसपुरा, कुटुंबा, मदनपुर, नवीनगर, ओबरा और रफीगंज प्रखंड के 54 ऐसे प्राथमिक, मध्य व उर्दू विद्यालय सामने आए, जहां पोर्टल पर बच्चों का डेटा पूरी तरह ‘शून्य’ (Zero) था। इसे सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना और कार्य में घोर लापरवाही मानते हुए विभाग ने इन सभी के वेतन में तीन दिनों की कटौती कर दी है। साथ ही इन्हें अगले तीन दिनों के भीतर शत-प्रतिशत डेटा एंट्री का काम पूरा करने की आखिरी मोहलत दी गई है।

30% से कम काम करने वाले 261 प्रधानाध्यापक नपे, नवीनगर में सर्वाधिक नोटिस

वेतन कटौती के अलावा जिले के उन 261 स्कूलों पर भी शिकंजा कसा गया है, जहां नामांकन की ऑनलाइन प्रविष्टि तो शुरू हुई, लेकिन वह 30 प्रतिशत का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी। विभाग ने इन सभी संस्थापकों को दो दिन के भीतर लिखित जवाब देने को कहा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। आंकड़ों के लिहाज से सबसे खराब स्थिति नवीनगर प्रखंड की रही, जहां सबसे ज्यादा 43 स्कूलों को नोटिस थमाया गया है। इसके बाद रफीगंज के 34, कुटुंबा के 30 और ओबरा के 25 स्कूलों समेत अन्य प्रखंडों के शिक्षक इस कार्रवाई के दायरे में आए हैं।

कागजी दावों का दौर खत्म, अब पोर्टल के आंकड़ों से तय होगी जवाबदेही

शिक्षा विभाग की इस अचानक और ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे जिले के शैक्षणिक महकमे और शिक्षक संगठनों में हड़कंप मच गया है। नोटिस और वेतन कटौती से बचने के लिए अब प्रभावित शिक्षक दिन-रात ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर छात्रों का डेटा फीड करने में जुट गए हैं। शिक्षा विभाग ने इस कार्रवाई के जरिए साफ संदेश दे दिया है कि अब फाइलों या कागजों में किए गए दावों को सच नहीं माना जाएगा; शिक्षकों और अधिकारियों की परफॉर्मेंस का आकलन केवल पोर्टल पर दिखने वाले लाइव और वास्तविक आंकड़ों के आधार पर ही किया जाएगा।

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