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बिहार के रेल यात्रियों की खुली किस्मत!


न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार के रेल यात्रियों के लिए सफर की राह बेहद आसान और आधुनिक होने जा रही है. केंद्र सरकार ने राज्य के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को बदलने के लिए एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने छपरा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि आने वाले 5 से 8 वर्षों के भीतर बिहार को 200 नई ट्रेनों की सौगात मिलने वाली है. उन्होंने कहा कि इस कदम से न केवल यात्रियों को भीड़भाड़ से राहत मिलेगी, बल्कि राज्य में आर्थिक विकास के नए रास्ते भी खुलेंगे.

पटना-दिल्ली बुलेट ट्रेन कॉरिडोर: समय की होगी भारी बचत

बिहार के लिए सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी योजना बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को लेकर रेल मंत्री ने अहम जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि प्रस्तावित दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर काम योजना के तहत आगे बढ़ेगा. इस हाई-स्पीड नेटवर्क के धरातल पर उतरने के बाद पटना से देश की राजधानी दिल्ली का सफर महज 4 घंटे 45 मिनट में तय किया जा सकेगा. इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि देश में करीब 7000 किलोमीटर लंबा बुलेट ट्रेन नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत अगले साल मुंबई-अहमदाबाद रूट से होने की उम्मीद है.

छपरा से दो एक्सप्रेस ट्रेनों का आगाज़, वंदे भारत-अमृत भारत की संख्या बढ़ी

समारोह के दौरान रेल मंत्री ने छपरा और मऊ से दिल्ली (आनंद विहार) के लिए दो नई एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. साथ ही, दोहरीघाट-औड़िहार ट्रेन की सेवा का विस्तार अब वाराणसी सिटी तक कर दिया गया है. रेल मंत्री ने आंकड़ों के जरिए बताया कि बिहार में पहले का रेल बजट जो मात्र 1000 करोड़ रुपये हुआ करता था, वह अब 10 गुना बढ़कर 10 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. वर्तमान में बिहार के रेल नेटवर्क पर 14 वंदे भारत और 11 अमृत भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें अपनी सेवाएं दे रही हैं.

रेल नेटवर्क का कायाकल्प: 36 जिलों तक पहुंची पहुंच

कार्यक्रम में मौजूद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान में राज्य के भीतर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रेल परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है. उन्होंने जानकारी दी कि सूबे के 38 में से 36 जिले अब सीधे रेलवे ग्रिड का हिस्सा बन चुके हैं. यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सफर देने के लिए रेलवे लाइनों के दोहरीकरण और तिहरीकरण का काम युद्धस्तर पर जारी है, जिसमें छपरा से कटिहार तक क्षमता विस्तार और गंगा के दोनों तटों पर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण शामिल है.

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