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मंत्री श्रेयसी सिंह की बैठक में PPP-CSR मॉडल और स्टेडियम संचालन पर बड़ा फोकस


न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क

पूजा शर्मा ( संवाददाता ) / पटना – बिहार में खेल अवसंरचना को मजबूत और व्यवस्थित बनाने की दिशा में खेल विभाग लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में विकास भवन स्थित खेल विभाग में खेल मंत्री Shreyasi Singh की अध्यक्षता में विभागीय योजनाओं और खेल ढांचे के विकास को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में खेल विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल, निदेशक आरिफ अहसन और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक Ravindran Shankaran सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में राज्य में निर्मित स्टेडियम, खेल भवन और व्यायामशालाओं के संचालन, रखरखाव और अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने पर विशेष फोकस किया गया। खेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि खेल परिसरों को केवल निर्माण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें निरंतर सक्रिय और खिलाड़ियों के लिए उपयोगी बनाया जाएगा।

पीपीपी और सीएसआर मॉडल से नई व्यवस्था की तैयारी

बैठक में राज्य के खेल ढांचे को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए नए मॉडल पर भी चर्चा की गई। निर्णय लिया गया कि खेल परिसरों के संचालन में पीपीपी (Public Private Partnership) मॉडल और सीएसआर सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके। इसके लिए विस्तृत एसओपी (Standard Operating Procedure) तैयार करने का निर्देश दिया गया। साथ ही जिला स्तर पर खेल संघों के सहयोग से प्रशिक्षण केंद्रों का संचालन और खिलाड़ियों को आवश्यक खेल उपकरण उपलब्ध कराने की योजना पर भी मंथन हुआ। बैठक में यह भी तय किया गया कि स्थानीय स्तर पर खेल गतिविधियों को मजबूत करने के लिए पारदर्शी और प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि प्रतिभाओं को बेहतर अवसर मिल सकें।

मौजूदा ढांचे के सुदृढ़ीकरण पर रहेगा फोकस

समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि फिलहाल नए पंचायत स्तरीय खेल मैदानों के निर्माण की बजाय पहले से मौजूद खेल परिसंपत्तियों को सुदृढ़ और सक्रिय किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय विधायक, खेल विशेषज्ञ और जिला खेल पदाधिकारी की भागीदारी से समितियों के गठन पर सहमति बनी। इसके अलावा बिहार के ऐतिहासिक खिलाड़ियों और पदक विजेताओं के सम्मान में स्टेडियम और खेल परिसरों के नामकरण का भी प्रस्ताव रखा गया। बैठक में राजगीर में निर्माणाधीन स्पोर्ट्स साइंस सेंटर, ओलंपिक ट्रेनिंग सेंटर और नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही जिला खेल पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को तेज करने पर भी बल दिया गया, ताकि राज्य में खेल विकास की गति और अधिक तेज हो सके।

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