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ग्वालपाड़ा में जमीन सर्वे पर भाकपा का हल्लाबोल, बोले- ‘जान देंगे, जमीन नहीं’


न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क 
रमण कुमार/ मधेपुरा:
 बिहार के मधेपुरा जिले के ग्वालपाड़ा प्रखंड में जमीन सर्वे को लेकर सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानी भाकपा ने जमीन सर्वे में कथित धांधली और आदिवासियों की जमीन से जुड़े विवादों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी के राष्ट्रव्यापी पदयात्रा अभियान के पांचवें दिन बड़ी संख्या में पदयात्री सड़क पर उतरे और सरकार तथा प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।

भाकपा की यह पदयात्रा उत्क्रमित मध्य विद्यालय संथाली टोला, अरार के मैदान से शुरू हुई। पदयात्री हाथों में पार्टी के झंडे और बैनर लिए हुए थे। ढोल-नगाड़ों के साथ निकली पदयात्रा ग्वालपाड़ा प्रखंड के अलग-अलग मोहल्लों से होकर गुजरी और आखिरकार ग्वालपाड़ा पेट्रोल पंप के पास पहुंची। यहां पदयात्रियों ने प्रदर्शन करते हुए जमीन सर्वे से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

प्रदर्शन का नेतृत्व भाकपा के राष्ट्रीय परिषद सदस्य प्रमोद प्रभाकर, सहायक जिला मंत्री रमेश कुमार शर्मा, वरीय नेता कानू वास्की, दिलीप किसकु और मुंशी हेंब्रम समेत कई नेताओं ने किया।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए भाकपा नेता प्रमोद प्रभाकर ने आदिवासियों और दलितों के अधिकारों को लेकर सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्वालपाड़ा प्रखंड के शाहपुर संथाली टोला में जमीन सर्वे के दौरान आदिवासियों को परेशान किया जा रहा है और उनकी जमीन को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं।

प्रमोद प्रभाकर ने आरोप लगाया कि सर्वे में शामिल कर्मचारियों द्वारा आदिवासियों की जमीन की कथित तौर पर बोली लगाए जाने और उन्हें जमीन से बेदखल करने की धमकी दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
भाकपा नेता ने कहा कि आदिवासी समाज की लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं बल्कि जल, जंगल और जमीन के अधिकार की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि जिन जमीनों पर आदिवासी परिवार दशकों से खेती और जीवन-यापन करते आए हैं, वहां से उन्हें हटाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी आदिवासियों के अधिकारों के लिए व्यापक आंदोलन करेगी। इसी दौरान उन्होंने नारा दिया ‘जान देंगे, जमीन नहीं।’

भाकपा नेता ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से आगामी 1 सितंबर को दिल्ली पहुंचने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों और आम लोगों से जुड़े सवालों को लेकर पार्टी अपना आंदोलन और तेज करेगी।

वहीं, भाकपा के सहायक जिला मंत्री रमेश कुमार शर्मा ने कहा कि पार्टी की राष्ट्रव्यापी पदयात्रा का मकसद सिर्फ राजनीतिक प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि गांव-गांव पहुंचकर लोगों की वास्तविक समस्याओं को समझना है। उन्होंने कहा कि पदयात्रा के दौरान किसानों, मजदूरों, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों की समस्याओं को सुना जा रहा है और उनके समाधान के लिए संघर्ष की रणनीति तैयार की जा रही है।

रमेश कुमार शर्मा ने केंद्र सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताते हुए कहा कि दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

इस प्रदर्शन में भाकपा नेता सरोज मुर्मू, हीरालाल बास्की, भाया राम मरांडी, रंजीत मरांडी, सुरजा हांसदा, मोहन हंसदा, महादेव मरांडी, रघुनंदन मुर्मू, दुर्गानंद मुरमुर, ठाकुर मुर्मू, भगवान वेसरा, राहुल सोरेन, रमेश ऋषिदेव समेत बड़ी संख्या में पदयात्री शामिल हुए। महिला कार्यकर्ताओं में मीना मुरमुर, रानी देवी और पूनम देवी सहित कई महिलाएं भी प्रदर्शन का हिस्सा बनीं।

ग्वालपाड़ा में हुए इस प्रदर्शन ने जमीन सर्वे की प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाकपा ने जहां कथित धांधली की जांच और आदिवासियों के जमीन अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई है, वहीं अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है। फिलहाल, जमीन सर्वे का मुद्दा ग्वालपाड़ा में राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा केंद्र बनता नजर आ रहा है

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