न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क : राज्य के अंगीभूत महाविद्यालयों में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति में 15 साल का शिक्षण अनुभव जरूरी होगा। इसमें बिहार सरकार का आरक्षण प्रविधान का अनुपालन करना होगा। इसमें किसीप्रकार की लापरवाही बरतने वाले कुलपतियों पर कार्रवाई होगी। इससे संबंधित नियमावली का पालन करने हेतु राज्यपाल सचिवालय ने कुलाधिपतियों को निर्देश दिया है। अगर प्रधानाचार्य के अभ्यर्थी पर किसी प्रकार का आरोप है तो उन्हें नियुक्त नहीं किया जाएगा।
इस कारण से हटाए जाएंगे प्रधानाचार्य
राजभवन सचिवालय के मुताबिक, अंगीभूत महाविद्यालयों में प्रधानाचार्य के पदों पर नियुक्ति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की गाइडलाइन का अनुपालन अनिवार्य किया गया है। भले ही प्रधानाचार्य पद पर नियुक्ति पांच वर्षों का हो, लेकिन गंभीर आरोप लगने पर बीच में प्रधानाचार्य हटाए जाएंगे।
बेहतर प्रदर्शन पर होगा कार्यकाल विस्तार
वहीं, बेहतर प्रदर्शन पर पांच वर्षों का एक कार्यकाल और विस्तार दिया जाएगा, जो सेवा विस्तार के रूप में अंकित किया जाएगा। प्रधानाचार्य की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार पर बीस अंक हैं।
अधिकतम उम्र सीमा 60 वर्ष
प्रधानाचार्य पद के लिए अभ्यर्थी की अधिकतम उम्र सीमा साठ वर्ष निर्धारित है। प्रधानाचार्य पद पर नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय के तीन सदस्यीय कमेटी अभ्यर्थी का चयन करेगी।
