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बिहार में जमीन खरीद-बिक्री नियम में परिवर्तन


न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क : बिहार में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के हर मामले में सरकारी जमीन के रिकॉर्ड की जांच अनिवार्य होगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों, अनुमंडल पदाधिकारियों और अंचल अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार का कहना है कि कई मामलों में सरकारी जमीन पर गलत तरीके से जमाबंदी बना दी जाती है। कुछ मामलों में फर्जी दावे भी सामने आते हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है।

ऐसे होगा आवेदन पर अंतिम फैसला 

विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक अब दाखिल-खारिज के हर आवेदन की जांच बिहार भूमि पोर्टल पर उपलब्ध सरकारी जमीन की सूची से की जाएगी। मिलान और सत्यापन के बाद ही आवेदन पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। राजस्व विभाग ने बताया है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड और सरकारी भूमि के सत्यापन के आधार पर ऐसी जमाबंदियों की सूची तैयार की गई है, जिनमें सरकारी जमीन दर्ज होने की आशंका है। यह सूची सभी अंचल अधिकारियों के लॉगिन में उपलब्ध करा दी गई है। 

दाखिल खारिज में गड़बड़ी की रिपोर्ट

विभागीय समीक्षा में पाया गया कि कई जगहों पर दाखिल-खारिज के दौरान सरकारी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का सही तरीके से मिलान नहीं किया जा रहा था। इसके कारण सरकारी भूमि पर गलत जमाबंदी कायम रहने का खतरा बना हुआ था। अब अधिकारियों को हर मामले में जांच करना जरूरी होगा। सरकार ने सरकारी जमीन के हस्तांतरण के नियमों में भी बड़ा बदलाव किया है. इससे विकास योजनाओं को तेजी से लागू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

क्या-क्या हुआ परिवर्तन 

नई व्यवस्था के अनुसार अब जिलाधिकारी (DM) 10 एकड़ तक सरकारी या गैरमजरूआ आम जमीन का मुफ्त हस्तांतरण कर सकेंगे। पहले इसके लिए लंबी प्रक्रिया अपनानी पड़ती थी। वहीं 10 से 20 एकड़ तक जमीन के हस्तांतरण का अधिकार प्रमंडलीय आयुक्त को दिया गया है। अगर जमीन का रकबा 20 एकड़ से अधिक होगा, तो उसके लिए राज्य कैबिनेट की मंजूरी लेना जरूरी होगा। सरकार का मानना है कि इससे स्कूल, अस्पताल, सड़क और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आसान होगी। साथ ही सरकारी जमीन पर अवैध दावों और गड़बड़ियों पर भी रोक लगेगी।

बिहार में अभी क्या बदला है?

अब हर दाखिल-खारिज आवेदन की जांच सरकारी जमीन के रिकॉर्ड से मिलाकर की जाएगी। इससे कोई व्यक्ति सरकारी जमीन को अपनी बताकर दाखिल-खारिज नहीं करा सकेगा। रजिस्ट्री से जमीन खरीदी जाती है, लेकिन दाखिल-खारिज से सरकारी रिकॉर्ड में मालिक का नाम बदला जाता है।

दाखिल-खारिज क्या है?

मान लीजिए आपके पिताजी ने एक जमीन खरीदी। जमीन की रजिस्ट्री तो हो गई, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में अभी भी पुराने मालिक का नाम दर्ज है। सरकारी रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम हटाकर नए मालिक का नाम चढ़ाने की प्रक्रिया को ही दाखिल-खारिज कहते हैं।
 

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