बिहार में पकड़ा गया पाकिस्तान का मोहरा, MP-Bihar ATS का बड़ा एक्शन, मधुबनी से दबोचा गया पाक हैंडलर का मददगार इजहारुल
न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: देश की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की साजिश रचने वाले संदिग्ध तत्वों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों को एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. बिहार और मध्य प्रदेश की आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) की टीमों ने एक बेहद गोपनीय और साझा ऑपरेशन चलाकर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल एक संदिग्ध को धर दबोचा है. गिरफ्तार आरोपी की पहचान 56 वर्षीय इजहारुल हक के रूप में हुई है, जो मूल रूप से मधुबनी का रहने वाला है. एटीएस का दावा है कि तकनीकी सर्विलांस और शुरुआती जांच से यह साफ हुआ है कि आरोपी सीमा पार बैठे एक पाकिस्तानी हैंडलर के साथ लगातार खुफिया तौर पर जुड़ा हुआ था.
रहमान चौक के पास बिछाया गया जाल, वहीं से हुआ गिरफ्तार
बिहार एटीएस से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार इजहारुल हक का पैतृक निवास मधुबनी जिले के जाले थाना क्षेत्र स्थित नवानी गांव में है. हालांकि, वह फिलहाल मधुबनी नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मोहम्मदी मोहल्ले में अपना ठिकाना बनाकर रह रहा था. सुरक्षा एजेंसियों को काफी समय से उसकी गतिविधियों और संदिग्ध हरकतों का इनपुट मिल रहा था, जिसके बाद रणनीति के तहत रहमान चौक के पास जाल बिछाकर उसे दबोच लिया गया.
मध्य प्रदेश से जुड़े हैं तार, ज्वाइंट ऑपरेशन में मिली सफलताएटीएस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यह पूरी दबिश मध्य प्रदेश एटीएस द्वारा दर्ज की गई एक गंभीर मामले की एफआईआर (FIR) की जांच के सिलसिले में की गई है:
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एमपी कनेक्शन: जांच के दौरान इस देशविरोधी नेटवर्क के तार बिहार के मधुबनी में बैठे इजहारुल हक से जुड़ते पाए गए.
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साझा रणनीति: इसके बाद एमपी और बिहार एटीएस ने बिना वक्त गंवाए एक संयुक्त टीम बनाई और इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी को अंजाम देकर आरोपी को दबोच लिया.
दो स्मार्टफोन जब्त, पाकिस्तानी चैट्स और कॉल डिटेल्स खंगाल रही टीम
दबिश के दौरान सुरक्षा बलों ने आरोपी इजहारुल हक के पास से दो हाई-टेक एंड्रॉयड स्मार्टफोन बरामद किए हैं. सुरक्षा एजेंसियों के डिजिटल एक्सपर्ट्स इन दोनों मोबाइल फोन, सोशल मीडिया चैट्स और क्लाउड डेटा की बारीकी से फोरेंसिक जांच कर रहे हैं. अधिकारियों का मानना है कि इन मोबाइलों में मौजूद कॉल रिकॉर्ड्स और डिलीट किए गए डेटा से पाकिस्तान से जुड़े इस पूरे सिंडिकेट और भारत में मौजूद इसके अन्य मददगारों के नाम सामने आ सकते हैं.
आगे की कानूनी कार्रवाई और पूछताछ तेज
जांच अधिकारियों के अनुसार, यह मामला सीधे तौर पर देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा हुआ है. फिलहाल इस पूरे स्लीपर सेल या नेटवर्क के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए मामले की गहन तफ्तीश जारी है. एटीएस बरामद सबूतों के आधार पर आरोपी को रिमांड पर लेकर आगे की कड़ी पूछताछ की तैयारी कर रही है ताकि आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां की जा सकें.
