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खेती-किसानी में AI की एंट्री! मौसम के मिजाज से लेकर वैज्ञानिक सलाह तक सबकुछ मिलेगा एक साथ, जानें और क्या मिलेगी सुविधा


न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार के किसानों को आधुनिक तकनीक से लैस करने और तमाम कृषि सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। कृषि विभाग की पहल पर अब बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर की तमाम किसान-अनुकूल सेवाओं को ‘बिहार कृषि डिजिटल प्लेटफॉर्म’ के साथ एकीकृत (इंटीग्रेट) करने की तैयारी चल रही है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य किसानों को उन्नत शोध, तकनीकी सलाह और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके मोबाइल तक पहुंचाना है।

कृषि निदेशक ने सबौर विवि के कुलपति को लिखा पत्र

इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति (वीसी) को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ सेवाओं को राज्य सरकार के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। विभाग का लक्ष्य है कि किसानों को अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर न जाना पड़े और उन्हें विश्वविद्यालय का वैज्ञानिक मार्गदर्शन सीधे सरकारी ऐप पर मिल जाए।

‘बिहार कृषि ऐप’ की ताकत: 12 लाख से अधिक किसान पहले से एक्टिव

राज्य सरकार द्वारा विकसित किया गया यह डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। ऐप की मौजूदा स्थिति और लक्ष्यों पर एक नजर:

  • वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म पर 12 लाख से ज्यादा किसान पंजीकृत हैं, और यह आंकड़ा हर दिन बढ़ रहा है।

  • किसानों की आमदनी में इजाफा करना, मौसम और जलवायु परिवर्तन के खतरों से फसलों को बचाना और कृषि विशेषज्ञता को हर गांव तक सुलभ बनाना।

  • अब विश्वविद्यालय द्वारा दी जाने वाली ट्रेनिंग, कृषि परामर्श, नए शोध (रिसर्च) और प्रसार गतिविधियों को भी इसी एकल मंच पर लाया जा रहा है।

मौसम के मिजाज से लेकर AI चैटबॉट ‘भारत विस्तार’ तक की सुविधा

यह डिजिटल ऐप पहले से ही किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो रहा है। इसके जरिए किसानों को कई आधुनिक सुविधाएं दी जा रही हैं

ऐप की प्रमुख विशेषताएं:

  • सटीक मौसम पूर्वानुमान: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के डेटा के आधार पर किसानों को समय-समय पर कृषि-मौसम संबंधी सलाह भेजी जाती है।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद: ऐप में ‘भारत विस्तार’ नाम का एक एआई-आधारित चैटबॉट काम कर रहा है, जो किसानों के सवालों का तुरंत जवाब देता है।
  • विश्वसनीय कंटेंट: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की प्रामाणिक सामग्री के जरिए किसानों को उन्नत खेती के गुर सिखाए जा रहे हैं।

जल्द होगी हाई-लेवल मीटिंग, एकीकरण पर बनेगी बात

इस डिजिटल मर्जर (एकीकरण) को अंतिम रूप देने के लिए कृषि विभाग की एक उच्चस्तरीय तकनीकी टीम जल्द ही सबौर विश्वविद्यालय का दौरा करेगी। वहां विश्वविद्यालय के अधिकारियों और वैज्ञानिकों के साथ मिलकर सेवाओं को ऐप पर लाइव करने की संभावनाओं और तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। विभाग को पूरा भरोसा है कि इस समन्वय से बिहार के किसानों को बेहद प्रामाणिक, वैज्ञानिक और समय पर सटीक जानकारी मिल सकेगी, जिससे सूबे में खेती का परिदृश्य बदलेगा।

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