न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क: नेपाल के सीमावर्ती मधेश क्षेत्र में हाल के दिनों में हुई हिंसक घटनाओं के बाद भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। अब सुपौल जिले के भीमनगर और कुनौली बॉर्डर से नेपाल जाने वाले यात्रियों के लिए सिर्फ आधार कार्ड या अन्य आइडेंटिटी कार्ड दिखाना पर्याप्त नहीं होगा।
प्रत्येक व्यक्ति को अनिवार्य रूप से फेस/बायोमैट्रिक स्क्रीनिंग से गुजरना होगा। यह व्यवस्था बच्चों, महिलाओं और पुरुषों सहित सभी यात्रियों पर समान रूप से लागू की गई है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भीमनगर और कुनौली सीमा चौकियों पर यात्रियों की लंबी कतारें लगने लगी हैं।
क्या है पूरा मामला
हर व्यक्ति की अलग-अलग डिजिटल स्क्रीनिंग किए जाने के कारण बॉर्डर पार करने में पहले की तुलना में ज्यादा समय लग रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच प्रक्रिया जरूरी है, लेकिन अतिरिक्त कर्मियों और स्क्रीनिंग काउंटरों की व्यवस्था की जाए ताकि लोगों को अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़े।
बता दें कि हाल ही में नेपाल के मधेश क्षेत्र में हुई हिंसक झड़पों में 4 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। हालात को नियंत्रित करने के लिए नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) और नेपाली सेना को मोर्चा संभाला था। नेपाल सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति की निगरानी की थी।
नेपाल की इन घटनाओं के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। भारत-नेपाल सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से निगरानी बढ़ा दी है। सीमावर्ती इलाकों में लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। साथ ही आइडेंटिटी वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को पहले से अधिक प्रभावी बनाया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब मोबाइल फोन में आइडेंटिटी कार्ड दिखाकर बॉर्डर क्रॉस करना संभव नहीं होगा। प्रत्येक यात्री को अपना वैलिड आइडेंटिटी कार्ड पेश करना होगा और इसके बाद फेस/बायोमैट्रिक स्क्रीनिंग करानी होगी।
स्क्रीनिंग पूरी होने के बाद ही सीमा पार करने की अनुमति दी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य अवैध घुसपैठ, तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
