न्यूज 11 भारत/पटना डेस्क: सुपौल जिले के सरकारी स्कूलों में हाउसकीपिंग योजना के तहत सफाई व्यवस्था को लेकर जन सुराज जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि 1800 से अधिक सफाईकर्मियों को श्रम कानून के अनुसार मिलने वाले मानदेय और सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। आरोप है कि सफाईकर्मियों को महज 1000 से 1500 रुपये प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है, जबकि ईपीएफ, ईएसआई, यूएएन, बीमा और अन्य सुविधाओं का प्रावधान संविदा में किया गया है।
अनिल कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में मजदूरी के नाम पर करीब 55 करोड़ रुपये की अनियमितता हुई है। उनका कहना है कि स्कूलों में सफाई के अलावा प्लंबिंग, सफाई सामग्री, ड्रेस, आईकार्ड और बायोमेट्रिक उपस्थिति जैसी शर्तें भी एजेंसी को पूरी करनी हैं, लेकिन धरातल पर इनका पालन नहीं हो रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में स्कूलों में गंदगी मिलने पर एजेंसी को शोकॉज किया गया और तीनों एजेंसियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। जांच कमेटियां गठित होने के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
अब एजेंसी का कार्यकाल समाप्त होने के बीच उसी एजेंसी को दोबारा काम देने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि विभिन्न प्रखंडों से भेजी गई अनुशंसा रिपोर्ट में सफाईकर्मियों को 1000 से 1500 रुपये भुगतान किए जाने की बात सामने आने के बावजूद इसे मानक के अनुरूप बताया गया है।
जन सुराज जिलाध्यक्ष ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, सफाईकर्मियों को नियमानुसार मानदेय और सभी वैधानिक सुविधाएं दिलाने तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, लगाए गए आरोपों पर शिक्षा विभाग या संबंधित एजेंसी का पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी इस मामले को लेकर जब शिक्षा पदाधिकारी संग्राम सिंह से दूरभाष के माध्यम से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है जांच के बाद सही रिपोर्ट दिया जाएगा।
