आंसू छलके, तबीयत बिगड़ी, तो झुकी RJD; जानें क्यों शिवचंद्र राम का इस्तीफा नामंजूर कर मान-मनौव्वल में जुटी पार्टी
न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव में टिकट न मिलने से आहत राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के दिग्गज दलित नेता शिवचंद्र राम को मनाने के लिए पार्टी नेतृत्व ने कमर कस ली है। सोमवार को एससी-एसटी सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से दिए गए उनके इस्तीफे को राजद ने ठुकरा दिया है। पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने स्पष्ट किया कि शिवचंद्र राम दल के एक निष्ठावान और पुराने सिपाही हैं। उनके क्षोभ की खबर मिलते ही मुख्य सचेतक सहित कई आला नेताओं ने उनसे संपर्क साधा, जिसके बाद उनके त्यागपत्र को नामंजूर करने का फैसला लिया गया।
विधान परिषद की रेस से बाहर होने पर छलका था दर्द
दरअसल, शिवचंद्र राम को पूरी उम्मीद थी कि इस बार लालू-तेजस्वी की जोड़ी उन्हें उच्च सदन (MLC) भेजेगी। वे लगातार शीर्ष नेताओं के संपर्क में भी थे। मगर सोमवार को जैसे ही राजद ने वर्तमान एमएलसी डॉ. सुनील कुमार सिंह को दोबारा उम्मीदवार बनाने की मुहर लगाई, शिवचंद्र राम का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने बगावती तेवर अपनाते हुए पद छोड़ दिया।
मीडिया के सामने फूट-फूट कर रोए पूर्व मंत्री, कहा- ‘वादाखिलाफी से टूट गया हूं’
सोमवार को बुलाई गई प्रेस वार्ता में शिवचंद्र राम अपने जज्बात पर काबू नहीं रख पाए और कैमरे के सामने ही रो पड़े। उन्होंने बेहद भावुक होते हुए कहा कि पार्टी ने उनसे एमएलसी बनाने का वादा किया था, जिसे ऐन वक्त पर तोड़ दिया गया। उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे चार दिनों से सो नहीं पाए हैं और भगवान ऐसी जिंदगी किसी को न दे। इस भावुक प्रकरण के बाद बिहार की सियासत में गर्माहट आ गई।
मानसिक तनाव के चलते बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में इलाज जारी
लगातार उपेक्षा और मानसिक तनाव के कारण सोमवार की शाम अचानक पूर्व मंत्री की सेहत नासाज हो गई। उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहां फिलहाल डॉक्टर्स की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है।
साफ-सुथरी छवि वाले राजद के बड़े दलित चेहरे हैं शिवचंद्र राम
रविदास समाज से ताल्लुक रखने वाले शिवचंद्र राम की गिनती बिहार के कद्दावर और बेदाग छवि वाले दलित नेताओं में होती है। वे सूबे की सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए हाजीपुर की सुरक्षित सीट से चुनाव मैदान में उतारा था।
एनडीए के ऑफर को ठुकरा कर भी रहे वफादार, समर्थकों में था भरोसा
राजनीतिक गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, हाल ही में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कुछ बड़े दलों ने उन्हें पाला बदलने का न्योता दिया था। मगर शिवचंद्र राम ने अपनी निष्ठा राजद के प्रति बनाए रखी। उनके चाहने वालों का मानना था कि उनकी इसी वफादारी, बेदाग छवि और लंबे सियासी तजुर्बे का इनाम उन्हें इस बार जरूर मिलेगा।
क्या शांत होगा भीतरघात का यह तूफान?
भले ही पार्टी ने उनका इस्तीफा स्वीकार न करके डैमेज कंट्रोल की कोशिश की हो, लेकिन टिकट वितरण को लेकर उभरा यह असंतोष राजद के आंतरिक अंतर्विरोधों को उजागर कर गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि पार्टी आलाकमान अपने इस रूठे हुए सिपाही को किस तरह संतुष्ट करता है और यह विवाद यहीं थमता है या आगे कोई नया मोड़ लेता है।
