न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क( राहुल, शेरघाटी) गया जिला के इमामगंज थाना क्षेत्र के पाकडीह गांव के समीप शुक्रवार को हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। क्रिकेट खेलकर साइकिल से घर लौट रहे 12 वर्षीय छात्र उज्ज्वल कुमार को मिट्टी लदे तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने कुचल दिया। हादसे के बाद जिंदगी और मौत से जूझ रहे मासूम को अस्पताल पहुंचाने के लिए बुलाई गई एंबुलेंस भी बीच रास्ते में जवाब दे गई। परिजनों का आरोप है कि सड़क हादसे से ज्यादा एंबुलेंस की लापरवाही ने उनके बेटे की जान ले ली। घटना के बाद से गांव में मातम पसरा है। परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं, जबकि ग्रामीणों में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
क्रिकेट खेलकर मौसी के घर लौट रहा था उज्ज्वल, अचानक आई मौत
मृतक उज्ज्वल कुमार पलामू जिले के नौडीहा थाना क्षेत्र के तरीडीह गांव निवासी दामोदर मेहता का इकलौता बेटा बताया जा रहा है। वह इमामगंज के आरपीएस इंटरनेशनल स्कूल, पाकडीह में छठी कक्षा का छात्र था और अपनी मौसी के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था। बताया जाता है कि शुक्रवार की शाम वह अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलकर साइकिल से वापस घर लौट रहा था। रास्ते में पाकडीह के समीप सड़क पार करने के दौरान पीछे से आ रहे मिट्टी लदे ट्रैक्टर ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी भीषण थी कि छात्र कई फीट दूर जाकर सड़क पर गिर पड़ा और गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग दौड़कर घटनास्थल पर पहुंचे और खून से लथपथ छात्र को उठाकर बचाने की कोशिश करने लगे।
मौत से लड़ रहा था मासूम, बांकेबाजार के पास बंद हो गई एंबुलेंस
ग्रामीणों ने तत्काल एंबुलेंस बुलवाई और घायल छात्र को अस्पताल भेजा गया। परिजनों का आरोप है कि बांकेबाजार के पास पहुंचते ही एंबुलेंस अचानक खराब हो गई। जिस एंबुलेंस पर परिवार ने अपने बेटे की जिंदगी बचाने की उम्मीद टिका रखी थी, वही वाहन बीच सड़क पर खड़ा हो गया। एंबुलेंस के खराब होने के बाद कुछ देर तक चालक और कर्मी उसे चालू करने की कोशिश करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान गंभीर रूप से घायल उज्ज्वल दर्द से कराहता रहा। उसके शरीर से लगातार खून बह रहा था और हर मिनट उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। परिवार के लोग मदद के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन समय पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी।
परिजनों का छलका दर्द: “अगर एंबुलेंस नहीं खराब होती तो मेरा बेटा जिंदा होता”
घटना के बाद मृतक के परिजनों का दर्द गुस्से में बदल गया है। परिवार का कहना है कि हादसे के बाद भी उज्ज्वल की सांसें चल रही थीं, लेकिन एंबुलेंस खराब होने के कारण इलाज में हुई देरी ने उसकी जान ले ली। परिजनों का आरोप है कि यदि एंबुलेंस समय पर अस्पताल पहुंच जाती तो डॉक्टर उसका इलाज कर सकते थे और शायद आज उनका बेटा जिंदा होता। इलाज मिलने से पहले ही उज्ज्वल ने रास्ते में दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां बेटे का शव देखकर बार-बार बेहोश होती रही, जबकि पिता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव में जैसे ही यह खबर पहुंची, शोक की लहर दौड़ गई। स्कूल के शिक्षक, सहपाठी और ग्रामीण बड़ी संख्या में मृतक के घर पहुंचने लगे। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था—क्या समय पर इलाज मिलता तो यह मासूम बच सकता था?
स्वास्थ्य विभाग और लचर एंबुलेंस सेवा पर खड़े हुए बड़े सवाल
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित एंबुलेंस सेवा की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। लोगों का कहना है कि सरकार आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन जरूरत के समय यदि एंबुलेंस ही बीच रास्ते में खराब हो जाए तो आम लोगों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा? ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या एंबुलेंस की नियमित जांच होती है? क्या खराब वाहनों को भी सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है? और यदि वाहन फिट नहीं था तो उसे सेवा में क्यों लगाया गया?
ग्रामीणों में भारी आक्रोश, पुलिस जांच में जुटी
घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने दोषी ट्रैक्टर चालक की गिरफ्तारी, एंबुलेंस की तकनीकी स्थिति की जांच तथा जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता से हुई मौत है। यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जाएंगी। सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ट्रैक्टर की पहचान और चालक की तलाश में जुटी है। वहीं एंबुलेंस खराब होने के आरोपों की भी जांच किए जाने की बात कही जा रही है।
एक तरफ सड़क पर ट्रैक्टर की टक्कर से घायल मासूम जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा था, दूसरी तरफ उसे अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस ही रास्ते में दम तोड़ बैठी। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर उज्ज्वल कुमार की मौत सिर्फ सड़क हादसे से हुई या फिर लचर स्वास्थ्य व्यवस्था और एंबुलेंस सेवा की कथित लापरवाही ने भी उसकी जिंदगी छीन ली? अब पूरा इलाका प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।
