न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क : कर्नाटक के मुद्देनहल्ली स्थित सत्य साई ग्राम में स्वर्ण जयंती समारोह के मौके पर आयोजित सीएसआर कॉन्क्लेव-2026 को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि बिहार में देश के अन्य राज्यों की तुलना में सीएसआर मद में अपेक्षाकृत कम खर्च होता है। ऐसे में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और कौशल विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही संस्थाओं के लिए बिहार में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। राज्य सरकार ने निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं तथा प्रक्रियाओं को सरल बनाकर निवेशकों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराए हैं।
उत्तर और दक्षिण भारत के मिलन का प्रतीक यह मंच
श्री तिवारी ने कहा कि जिस प्रकार विभिन्न संस्थाओं ने दक्षिण भारत में समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, उसी प्रकार उत्तर भारत, विशेषकर बिहार के विकास में भी सहभागिता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज का यह मंच उत्तर और दक्षिण भारत के मिलन का प्रतीक है। जिस तरह आपने दक्षिण को संवारा, उसी तरह उत्तर को संवारने की भी जिम्मेदारी आपकी है।
शिक्षा मंत्री ने साझा किया अनुभव
शिक्षा मंत्री ने सत्य साई ग्राम में संचालित वेद विद्यालय, मेडिकल कॉलेज, अस्पताल तथा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों का अवलोकन करने के बाद अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने संस्थान की निस्वार्थ सेवा, अनुशासन, स्वच्छता और समाज के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायक मॉडल बताया।
वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन को बिहार में न्योता
उन्होंने वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन के संस्थापक सद्गुरु मधुसूदन साई से बिहार में भी कर्नाटक की तर्ज पर शैक्षणिक, स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी संस्थान स्थापित करने का आग्रह किया। कहा कि मिशन लंबे समय से बिहार में अवसर तलाश रही है। आज सरकार खुद आपके पास आई है। आप बिहार आएं और अपनी कीर्ति बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि बिहार के लगभग 97 हजार विद्यालयों में दो करोड़ से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिन्हें इस प्रकार की पहल से प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। श्री तिवारी ने कहा कि बिहार तेजी से विकास की ओर अग्रसर राज्य है। सड़क, रेल और हवाई संपर्क के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कानून व्यवस्था के मामले में बिहार अब उत्तर प्रदेश के समकक्ष पहुंच गया है और अपराध मुक्त राज्य बनने की ओर अग्रसर है।उन्होंने आश्वस्त किया कि बिहार में कार्य करने वाली संस्थाओं को राज्य सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा।
बिहार ज्ञान और आध्यात्मिक परंपराओं की भूमि
श्री तिवारी ने आगे कहा कि बिहार ज्ञान और आध्यात्मिक परंपराओं की भूमि रही है। भगवान बुद्ध, भगवान महावीर और कई महान विभूतियों ने इस धरती को गौरवान्वित किया है। बिहार और कर्नाटक का संबंध भी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक रूप से अत्यंत पुराना और मजबूत रहा है। मातृशक्ति की भूमिका का उल्लेख करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार में एक करोड़ से अधिक जीविका दीदियां सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की वाहक बनी हुई हैं और ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए समाज और सरकार दोनों को मिलकर कार्य करना होगा। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ नहीं पहुंचेगा, तब तक विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता।
पोषण सुरक्षा को मजबूत करने पर बल
कुपोषण मुक्त भारत की दिशा में बाजरा के महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार की उपजाऊ भूमि इस क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं रखती है और इससे पोषण सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है। कॉन्क्लेव में सद्गुरु के अलावा टीसीएस के पूर्व सीईओ और एमडी रामो दुरई, सेबी के पूर्व चेयरमैन एन दामोदरन, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सीईओ केआर लक्ष्मीनारायण समेत सीएसआर के क्षेत्र में कार्य कर रहीं नामचीन हस्तियां मौजूद थीं।
