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भाजपा, तेजस्वी या फिर प्रशांत किशोर की लगेगी लॉटरी 


न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क : पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए कल वोटिंग होनी है। मंगलवार (28 जुलाई) को चुनाव प्रचार का अंतिम दिन था और इस दौरान सभी प्रत्याशियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। 

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा के समर्थन में सीएम सम्राट चौधरी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, भोजपुरी अभिनेता एवं सांसद मनोज तिवारी, अभिनेता पवन सिंह और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी रोड शो और जनसंपर्क अभियान किया। 

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) कैंडिडेट रेखा गुप्ता के समर्थन में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अंतिम दो दिनों तक खूब प्रचार किया। उन्होंने कई इलाकों में रोड शो और जनसंपर्क अभियान चलाया। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी प्रचार के अंतिम दिन व्यापक जनसंपर्क किया। 

बांकीपुर उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रतिष्ठा, प्रशांत किशोर की राजनीतिक साख और तेजस्वी यादव की चुनावी रणनीति दांव पर लगी है। यही कारण है कि सभी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत चुनावी मैदान में लगा दी है। एक तरफ जहां भाजपा अपने पारंपरिक वोट बैंक, व्यापारी वर्ग, मध्यम वर्ग और मजबूत बूथ संगठन के भरोसे चुनाव लड़ रही है। साथ ही पार्टी अपने जातीय समीकरणों को भी मजबूत बनाए रखने में जुटी हुई है। वहीं दूसरी ओर, जन सुराज की नजर भी मुख्य रूप से बदलाव चाहने वाले वोटरों पर है। 

भाजपा ने जहां अपने प्रमुख नेताओं और मंत्रियों को चुनाव प्रचार में उतारा है वहीं, जन सुराज युवा मतदाताओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाता को लुभाने की कोशिश में लगे हैं। 
अब अगर राजद की बात करें तो यह अपने पारंपरिक ‘MY (मुस्लिम-यादव)’ समीकरण के भरोसे चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रही है। 

वैसे तो उपचुनावों में मतदान प्रतिशत कम रहता है लेकिन इस बार सभी दलों की नजर मतदान प्रतिशत पर टिकी है। अगर वोट अपेक्षा से ज्यादा होता है, तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। राजनीतिक दलों की दिलचस्पी युवा मतदाताओं में सबसे अधिक है।

क्या युवा बदल देंगे चुनावी समीकरण?

युवा सोशल मीडिया पर अधिक एक्टिव रहते हैं और नए मुद्दों पर तेजी से राय रखते हैं। वे किसी एक राजनीतिक दल के स्थायी समर्थक नहीं माने जाते हैं और यही वजह है कि युवा को किसी भी दल का तयशुदा वोट बैंक नहीं माना जाता। चुनाव के दौरान स्थानीय मुद्दों, रोजगार, शिक्षा और राजनीतिक मैसेजों के आधार पर उनका रुख बदल सकता है। ऐसे में यह देखना इंट्रेस्टिंग होगा कि बांकीपुर में युवा मतदाता चुनावी रिजल्ट को कैसे प्रभावित करते हैं।

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