न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार के भोजपुर जिला अंतर्गत शाहपुर थाना क्षेत्र में हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब एक नया और बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है। इस पूरे प्रकरण में कर्तव्यहीनता और स्थिति को नियंत्रित करने में नाकाम रहने के आरोप में पुलिस महकमे पर गाज गिरी है। भोजपुर पुलिस कप्तान (एसपी) मिस्टर राज ने त्वरित एक्शन लेते हुए शाहपुर के थाना अध्यक्ष राजेश मालाकार, दो पुलिस अवर निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) और एक कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस प्रशासनिक हंटर के बाद पूरे महकमे में खलबली मच गई है। हालांकि, मृतक का परिवार इस निलंबन से संतुष्ट नहीं है और वे आरोपी अधिकारियों की बर्खास्तगी पर अड़े हैं।
6 घंटे तक बंधक रहा इलाका, लिखित भरोसे के बाद शांत हुआ आक्रोश
इस कथित मुठभेड़ के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। इंसाफ की मांग को लेकर इलाके में करीब छह घंटे तक जोरदार हंगामा और प्रदर्शन हुआ। इस दौरान मौके पर पहुंचे एएसपी राजकुमार साह को परिजनों ने एक शिकायती पत्र सौंपा। एएसपी द्वारा उस आवेदन पर हस्ताक्षर कर उसे स्वीकार करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई का ठोस आश्वासन देने के बाद ही उग्र प्रदर्शन शांत हो सका।
फेसबुक लाइव के बाद क्या हुआ? मां के आवेदन में रोंगटे खड़े करने वाले दावे
मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी ने पुलिस प्रशासन को दिए आवेदन में एनकाउंटर की थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि:
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प्रशासनिक बहकावा: 17 जून की सुबह करीब 8 बजे शाहपुर पुलिस और जगदीशपुर डीएसपी उनके घर पहुंचे। उन्होंने भरत से कहा कि जवइनियां बाढ़ विस्थापितों की समस्याओं और उनकी मांगों को समझाने के लिए वे उनके साथ चलें, क्योंकि भरत लगातार बाढ़ पीड़ितों की आवाज उठा रहा था।
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सरेंडर की कहानी: घटना स्थल के पास पहुंचकर भरत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लाइव था। अपनी बात रखने के बाद उसने कानून का सम्मान करते हुए अपना हथियार पुलिस के सामने जमीन पर डाल दिया और खुद को सरेंडर कर दिया।
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धक्का देकर दागी गोलियां: मां का आरोप है कि आत्मसमर्पण के बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसे धक्का देकर एक गड्ढे में गिरा दिया। इसके बाद वहां मौजूद जगदीशपुर पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के कथित आदेश पर पुलिस बल ने भरत पर ताबड़तोड़ 5 गोलियां दाग दीं और उसे लहूलुहान हालत में गाड़ी में लादकर ले गए।
पिता को थाने में बिठाया, शाम को दी मौत की खबर
परिजनों का आरोप है कि एक तरफ भरत को गोलियां मारी गईं, वहीं दूसरी तरफ उसके पिता को पूरे दिन शाहपुर थाने में जबरन बैठाकर रखा गया। देर शाम परिवार को सूचना दी गई कि इलाज के दौरान या घटना के कारण भरत की मौत हो चुकी है। पीड़ित परिवार की अब स्पष्ट मांग है कि इस कथित फर्जी एनकाउंटर में शामिल जगदीशपुर डीएसपी, निलंबित थाना प्रभारी और अन्य सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए और उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाए।
एसपी बोले—लापरवाही और अनुशासनहीनता पर कोई समझौता नहीं
इससे पहले, 16 जून को बेलौटी गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भोजपुर एसपी ने यह निलंबन की कार्रवाई की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे बल में जवाबदेही तय करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने में किसी भी स्तर पर ढिलाई या अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर मामले की गहराई से तफ्तीश कर रही है।
