न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
अभिषेक राज / गयाजी – जिले में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से शनिवार को जिला समाहरणालय सभागार में सड़क सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने हिस्सा लिया। इस दौरान गुरुआ विधायक उपेंद्र दांगी, अतरी विधायक रोमित कुमार, बाराचट्टी विधायक ज्योति मांझी, जिलाधिकारी शशांक शुभंकर, पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में जिले की सड़क सुरक्षा व्यवस्था की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई तथा दुर्घटनाओं को कम करने के लिए आवश्यक कदमों पर विस्तार से चर्चा हुई।
दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान कर सुरक्षा उपाय बढ़ाने का निर्देश
बैठक में सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों, दुर्घटना संभावित स्थलों (ब्लैक स्पॉट) की पहचान और वहां सुरक्षा संबंधी उपायों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि यातायात नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए ठोस और प्रभावी कार्रवाई करने पर बल दिया गया। बैठक में यह भी कहा गया कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है, इसलिए लोगों की सहभागिता भी आवश्यक है।
लालू-राबड़ी की सुरक्षा कटौती पर बोले मांझी, संवाद से निकले समाधान
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि सड़क सुरक्षा जनहित से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है और आम नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जागरूकता अभियान के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि सड़क हादसों में प्रभावी कमी लाई जा सके। वहीं, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा श्रेणी में कटौती के संबंध में पूछे गए सवाल पर मांझी ने कहा कि सुरक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है और परिस्थितियों के अनुसार सरकार निर्णय लेती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पक्ष को कोई समस्या है तो उसे सरकार के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए। इस तरह के मामलों में आंदोलन की बजाय संवाद का रास्ता अधिक उचित और प्रभावी होता है।
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