विश्व प्रसिद्ध गयाजी में पितृपक्ष के दौरान 17 दिवसीय पिंडदान अनुष्ठान की शुरुआत हो गई है।
न्यूज 11 भारत/बिहार डेस्क
अभिषेक राज/गया जी: विश्व प्रसिद्ध गयाजी में पितृपक्ष के दौरान 17 दिवसीय पिंडदान अनुष्ठान की शुरुआत हो गई है। पहले दिन श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के घाट पर पितरों का आह्वान कर पिंडदान की प्रक्रिया शुरू की। श्रद्धालुओं के अनुसार, यह अनुष्ठान 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।
गया में पिंडदान की विशेष परंपरा के तहत श्रद्धालु 17 दिनों के दौरान अलग-अलग वेदियों और धार्मिक स्थलों पर जाकर पिंडदान करेंगे। इस दौरान करीब 54 स्थानों पर पिंडदान किए जाने की परंपरा बताई गई है। श्रद्धालुओं का मानना है कि गया जी में पिंडदान करने से पितरों को सद्गति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
गया जी पहुंचे संदीप शास्त्री ने बताया कि पहले दिन फल्गु नदी के घाट पर पितरों का आह्वान कर पितृपुरोहितों के निर्देश के अनुसार पिंडदान की शुरुआत की गई। उन्होंने कहा कि 17 दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर जाकर पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उनके अनुसार, गया जी की धार्मिक मान्यता अन्य स्थानों से अलग है और यहां पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्मकांड का विशेष महत्व है।
वहीं, छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से करीब 40 श्रद्धालुओं का समूह गयाजी पहुंचा है। समूह में 14 जोड़े शामिल हैं। श्रद्धालु अपने दिवंगत माता-पिता, भाई और परिवार के अन्य सदस्यों की आत्मा की शांति और सद्गति की कामना को लेकर पिंडदान करने पहुंचे हैं।
श्रद्धालु महेश कुमार गर्ग ने बताया कि वे परिवार के साथ 17 दिनों के लिए गयाजी आए हैं। उन्होंने बताया कि उनके समूह ने बनारस से यात्रा शुरू की और गयाजी पहुंचने के बाद फल्गु नदी में पिंडदान किया। अब अगले 17 दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर जाकर पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।
श्रद्धालुओं ने कहा कि सनातन परंपरा में गयाजी में पिंडदान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यहां विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के चरण चिह्न की पूजा की जाती है। देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु अपने पितरों की सद्गति और मोक्ष की कामना लेकर गयाजी पहुंचते हैं।
