न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना – बिहार में कॉलेजों की संबद्धता (अफिलिएशन) से जुड़े मामलों के निपटारे को लेकर अब सख्त व्यवस्था लागू की गई है। राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन के निर्देश पर राजभवन ने सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा विभाग को तय समय-सीमा के भीतर संबद्धता प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है। इस कदम का उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामलों को समाप्त करना और उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना है। निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि समय-सीमा का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
हाईलाइट्स –
- बिहार में कॉलेज संबद्धता प्रक्रिया के लिए सख्त समय-सीमा तय।
- 15 सितंबर तक आवेदन, 15 फरवरी तक राज्य सरकार को निर्णय लेना होगा।
- समय-सीमा का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी।
- छात्रों के नामांकन, परीक्षा और डिग्री प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने पर जोर।
- पटना हाईकोर्ट के 2018 के आदेश और संबद्धता कैलेंडर का कड़ाई से पालन होगा।
हर चरण के लिए तय की गई अंतिम तिथि
राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुसार कॉलेजों को संबद्धता के लिए हर वर्ष 15 सितंबर तक आवेदन जमा करना होगा। इसके बाद 25 सितंबर तक निरीक्षण दल का गठन, 8 अक्टूबर तक निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करना और 15 अक्टूबर तक संबद्धता समिति की बैठक आयोजित करनी होगी। वहीं 20 अक्टूबर तक अकादमिक परिषद तथा 30 अक्टूबर तक सिंडिकेट की बैठक संपन्न करानी होगी। इसके बाद 15 नवंबर तक सीनेट की मंजूरी लेने और 15 जनवरी तक अंतिम प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजने की अनिवार्यता तय की गई है। राज्य सरकार को भी 15 फरवरी तक उस पर निर्णय देना होगा।
कमियां मिलने पर भी निर्धारित रहेगा पूरा कार्यक्रम
यदि किसी कॉलेज के प्रस्ताव में कोई कमी पाई जाती है, तो इसकी जानकारी 15 फरवरी तक संबंधित विश्वविद्यालय और कॉलेज को देनी होगी। कॉलेजों को 15 मार्च तक सभी कमियों को दूर करना होगा, जबकि विश्वविद्यालय 16 मार्च तक संशोधित प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजेंगे। इसके बाद राज्य सरकार को 16 अप्रैल तक अंतिम फैसला लेना होगा। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबद्धता संबंधी मामलों में अनावश्यक देरी न हो और संस्थानों को समय पर आवश्यक स्वीकृतियां मिल सकें।
नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
राजभवन ने अपने निर्देश में वर्ष 2018 से लागू संबद्धता कैलेंडर का उल्लेख करते हुए कहा है कि यह आज भी प्रभावी है और पटना हाईकोर्ट ने भी इसे वैधानिक मान्यता दी है। इसके बावजूद कई विश्वविद्यालयों में समय-सीमा का पालन नहीं होने की शिकायतें मिलती रही हैं। निर्देश में साफ कहा गया है कि निर्धारित कैलेंडर से किसी भी प्रकार का विचलन कुलाधिपति के आदेश और न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि इस फैसले से कॉलेजों की संबद्धता प्रक्रिया तेज होगी और छात्रों के नामांकन, परीक्षा तथा डिग्री से जुड़े कार्य समय पर पूरे हो सकेंगे।
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