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राजगीर में आज आस्था का महासैलाब, दूसरे शाही स्नान में जुटेंगे लाखों श्रद्धालु


न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क

पटना / गयाजी –  पुरुषोत्तमी मास मेले के दूसरे शाही स्नान को लेकर रविवार को राजगीर पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आएगा। सनातन परंपराओं, धार्मिक अनुष्ठानों और श्रद्धा के इस महापर्व में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से आए श्रद्धालु भी शामिल होंगे। प्रशासन का अनुमान है कि इस अवसर पर तीन लाख से अधिक श्रद्धालु राजगीर के पवित्र कुंडों और धार्मिक स्थलों पर स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे। मेले का मुख्य आकर्षण साधु-संतों, महंतों और विभिन्न अखाड़ों की भव्य शाही सवारी होगी, जो पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ निकाली जाएगी। ध्वज-पताकाओं, धार्मिक प्रतीकों और भक्ति संगीत से सुसज्जित यह शोभायात्रा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी और पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण का संचार करेगी।

हाईलाइट्स –

  • राजगीर में पुरुषोत्तमी मास मेले के दूसरे शाही स्नान का आयोजन आज।
  • तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का प्रशासनिक अनुमान।
  • अखाड़ों और संतों की भव्य शाही सवारी बनेगी मुख्य आकर्षण।
  • सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम।
  • पुरुषोत्तम पूर्णिमा पर अनुराधा नक्षत्र का विशेष संयोग, दान-पुण्य का शुभ अवसर।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम

दूसरे शाही स्नान को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक तैयारी की है। अनुमंडल पदाधिकारी सूर्य प्रकाश गुप्ता के अनुसार सभी संगतों, अखाड़ों और मठों के लिए स्नान की समय-सारिणी निर्धारित कर दी गई है, ताकि भीड़ का सुचारु प्रबंधन किया जा सके। मेला क्षेत्र के संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा बैरिकेडिंग, यातायात नियंत्रण, प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सा शिविर, पेयजल केंद्र और आपातकालीन सहायता सेवाओं को भी सक्रिय कर दिया गया है। शनिवार रात से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था, जिससे मेला क्षेत्र में रौनक बढ़ गई है। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

पूर्णिमा पर बन रहा विशेष ज्योतिषीय संयोग

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस बार पुरुषोत्तम पूर्णिमा पर अनुराधा नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान करने से सुख, समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से चंद्रमा से संबंधित वस्तुएं जैसे चावल, दही, शक्कर, सफेद वस्त्र, चांदी और पुष्पों का दान लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि इससे कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। रविवार को पूर्णिमा तिथि दोपहर 1:10 बजे तक रहेगी। वहीं सुबह 6:42 बजे से 11:47 बजे तक चर, लाभ और अमृत मुहूर्त, 11:20 बजे से 12:14 बजे तक अभिजित मुहूर्त तथा दोपहर 1:29 बजे से शाम 3:11 बजे तक शुभ योग का संयोग रहेगा, जिसे पूजा-पाठ और दान के लिए अनुकूल माना गया है।

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