न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
साकेत कुमार / पटना : सत्ता पक्ष द्वारा तेजस्वी के मार्च को फ्लॉप शो बताने पर राज्यसभा सांसद मनोज झा का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी से क्या उम्मीद करते हैं। वह हमारी तारीफ में तो नहीं बोलेंगे एक रटी रटाई स्क्रिप्ट होती है। स्क्रिप्ट तो बदला करो यार। तिरंगा लेकर के हजारों की संख्या में लोग किस लिए आए थे चांद सितारे मांगने आए थे बेहतर शिक्षा व्यवस्था समावेशी और ईमानदार परीक्षा प्रणाली।
संजय झा ने कहा कि यह मुद्दा खत्म हो गया सुप्रीम कोर्ट में झूठा हलफनामा कब दायर किया गया था? परसो किया गया था मर गया था क्या मुद्दा, एक गंभीरता होनी चाहिए किसी भी बयान में आप एक दल के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आपका हमसे पॉलिटिकल डायरफ्रेंस होगा वाजिब है लेकिन आप इस मुद्दे को खत्म हुआ बताते हैं गर्दनीबाग में खत्म हुए मुद्दे के साथ लोग बैठे हैं क्या? अभी शुरुआत हुई है अब छात्र और युवा आपके झुनझुना को नहीं पकड़ेगा हैडलाइन मैनेजमेंट यकीन नहीं करेगा वह स्कूल ठीक करवाइए आपसे विश्वविद्यालय ठीक करवाइए नौकरी की व्यवस्था डिग्री और नौकरी के बीच में पारस्परिक रिश्ता होता है तैयार हो जाइए।
लीडर का अपोजिशन कौन है जिंदा लोग ही होते हैं ना।
बीजेपी के साथ प्रधानमंत्री से लेकर उनके अदना नेता है बिहार के सब की स्क्रिप्ट पुरानी हो गई है नया लिखने वाला है नहीं। प्रधानमंत्री को नया स्क्रिप्ट लिखकर मिलता है तो दिमागी नक्सली बोल देते हैं यानी कि छात्र युवा बच्चे जो एक बेहतर परीक्षा प्रणाली मांग रहे हैं वह नक्सली है तो ऐसे लोगों के शब्दकोश में जो कमी है उसकी भरपाई हम जैसे लोग कैसे कर सकते हैं
छात्रों के मुद्दे पर सरकार क्यों बैक फुट पर नजर आती है?
सरकार खास करके मोदी जी के आने के बाद सरकार को ऐसा लगा कि मंदिर मस्जिद साइज बीच-बीच में बताते रहो इंडिया-पाकिस्तान करते रहो हिंदू मुसलमान करते रहो और चुनाव जीते रहो चुनाव जीतने को इन्होंने यह मान लिया कि चुनाव जीत गए अब हमसे सवाल कौन करेगा इन बच्चों ने छात्रों ने युवाओं ने यह बता दिया एक चुनाव और दूसरे चुनाव के बीच जिंदा मुद्दे खत्म नहीं हो जाते और उनके मुद्दे क्या है बेहतर परीक्षा प्रणाली बेहतर शिक्षा व्यवस्था और नौकरी की गारंटी इसी वादे पर 14 में प्रधानमंत्री आए थे लेकिन तेरे वादे में जिए हम आज नतीजा यह है कि उनके दिमागी ब्लूप्रिंट में इन सब कामों के लिए कोई जगह नहीं है इसलिए यह बैक फुट पर नजर आ रहे हैं इन्होंने तो चुनाव ही लड़ा लोगों के बीच में हमेशा कभी यह मुद्दा कभी वह मुद्दा लेकिन लोक सरोकार के मुद्दे कभी इनके जेहन में आ नहीं पाया।
वंदे मातरम पार्लियामेंट में लोग बोल चुके हैं खुद गुरुदेव महात्मा गांधी, सुभाष बाबू सब ने तय किया था। इनके पॉलिटिकल समझ में यही सारी चीज हैं इन्होंने इस संदर्भ में एक बिल पास कर दिया।
पीएम और गृह मंत्री को मनोज झा का खुला चैलेंज
मनोज झा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह बिना कागज के पूरा वंदे मातरम सुना दे, बिना कागज के बल्कि कागज देखकर भी बीच-बीच में फ्लो में सुना दे।
सत्यमेव जयते का पूरा अंश क्यों नहीं पढ़ा जाता न्यायालय में जो लिखा है वह भी पूरा पढ़िए आधा अधूरा क्यों दिक्कत यही है इनकी।
