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बिहार की सरकारी बसों में लगेगा फेस रिकग्निशन सिस्टम, बिना टिकट यात्रा और ओवरलोडिंग पर लगेगी लगाम


न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क 

पटना –  बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) की बसों में जल्द ही फेस रिकग्निशन आधारित आधुनिक निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था के तहत बस में चढ़ने वाले यात्रियों की संख्या का स्वतः रिकॉर्ड तैयार होगा और उसका मिलान जारी किए गए टिकटों से किया जाएगा। परिवहन विभाग का मानना है कि इससे बिना टिकट यात्रा और राजस्व चोरी पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। वर्तमान में निगम की सभी बसों में इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीन (ETM) की सुविधा उपलब्ध है, जिसके कारण टिकटों का डिजिटल रिकॉर्ड पहले से तैयार होता है। अब फेस रिकग्निशन तकनीक के जुड़ने से यात्रियों की वास्तविक संख्या और टिकट बिक्री के आंकड़ों का मिलान और अधिक सटीक तरीके से संभव हो सकेगा।

हाईलाइट्स –

  • BSRTC की बसों में जल्द लागू होगा फेस रिकग्निशन सिस्टम।
  • यात्रियों की संख्या का टिकटों से किया जाएगा मिलान।
  • बिना टिकट यात्रा और राजस्व चोरी पर लगेगी रोक।
  • ओवरलोडिंग की शिकायतों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
  • स्कूल बसों की निगरानी के लिए नया सॉफ्टवेयर विकसित किया जाएगा।
  • फिटनेस, प्रदूषण प्रमाणपत्र और रूट की होगी ऑनलाइन मॉनिटरिंग।

ओवरलोडिंग और अनियमितताओं पर लगेगी लगाम

विभागीय अधिकारियों के अनुसार नई तकनीक बसों में ओवरलोडिंग की समस्या पर भी नियंत्रण स्थापित करने में मदद करेगी। कई बार यात्रियों की वास्तविक संख्या और टिकटों की संख्या में अंतर होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। फेस रिकग्निशन सिस्टम के जरिए बस में चढ़ने और उतरने वाले यात्रियों का आंकड़ा उपलब्ध रहेगा, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता की तुरंत पहचान की जा सकेगी। इसके अलावा परिवहन विभाग ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कार्रवाई को और कड़ा करने की तैयारी में है। सरकार ऐसे मामलों में जुर्माने की राशि बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है, ताकि सड़क सुरक्षा मानकों का बेहतर तरीके से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

स्कूल बसों और वाहनों की होगी ऑनलाइन निगरानी

परिवहन विभाग सार्वजनिक परिवहन के साथ-साथ स्कूल बसों की निगरानी व्यवस्था को भी आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए एक नया सॉफ्टवेयर विकसित किया जाएगा, जिसके माध्यम से स्कूल बसों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। साथ ही वाहनों की फिटनेस, प्रदूषण प्रमाणपत्र, परमिट और निर्धारित रूट की ऑनलाइन मॉनिटरिंग भी की जाएगी। विभाग का उद्देश्य परिवहन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाना है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू होने के बाद नियमों के पालन में सुधार होगा, यात्रियों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी और परिवहन क्षेत्र में जवाबदेही भी बढ़ेगी। आने वाले समय में यह पहल बिहार की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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