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बिहार में जमीन के पुराने रिकॉर्ड पाना हुआ बेहद आसान; अंचलों में दलालों का खेल खत्म, घर बैठे मिलेगी डिजिटल कॉपी


बिहार में अपनी जमीन के पुराने और पुश्तैनी दस्तावेजों के लिए सरकारी दफ्तरों की खाक छानने वाले रैयतों (जमीन मालिकों) के लिए बड़ी राहत की खबर है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए डिजिटल सिस्टम को और मजबूत किया है। अब अगर कोई पुराना भूमि दस्तावेज ‘भू-अभिलेख पोर्टल’ पर नहीं मिल रहा है, तो विभाग उसकी स्कैन कॉपी ऑनलाइन उपलब्ध कराएगा। इस नई व्यवस्था को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए विभाग की उप निदेशक मोना झा ने सभी जिलाधिकारियों (DMs) को विस्तृत दिशा-निर्देश और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी कर दिया है।

जनवरी से बंद थी पुरानी व्यवस्था, आम लोगों को हो रही थी परेशानी

दरअसल, इसी साल जनवरी 2026 से सरकार ने जिला रिकॉर्ड रूम (अभिलेखागार) से जमीन के कागजातों की फिजिकल (कागजी) या ऑफलाइन स्कैन कॉपी देने पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। सरकार का मकसद सभी रिकॉर्ड को एक केंद्रीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाना था। लेकिन इस बीच एक व्यावहारिक समस्या खड़ी हो गई—कई बेहद पुराने और जरूरी दस्तावेज पोर्टल पर सर्च करने के बाद भी शो नहीं हो रहे थे। इसके चलते जमीन मालिकों को अपने ही कागजात हासिल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

‘भू-अभिलेख पोर्टल’ पर आएगा नया फीचर, ऐसे काम करेगी नई व्यवस्था

जनता की इस परेशानी को दूर करने के लिए अब पोर्टल पर एक विशेष विकल्प (नया फीचर) जोड़ा जा रहा है। इसके तहत पूरी प्रक्रिया बेहद आसान हो जाएगी:

  • यदि कोई दस्तावेज पोर्टल पर नहीं मिलता है, तो आवेदक घर बैठे ही उसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेगा।

  • आवेदन मिलते ही संबंधित अंचल अधिकारी (CO) या अभिलेख प्रभारी रिकॉर्ड रूम से मूल दस्तावेज को निकालेंगे।

  • उस दस्तावेज को तुरंत स्कैन करके पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा।

  • अपलोड होते ही आवेदक के डैशबोर्ड पर डिजिटल सर्टिफाइड कॉपी आ जाएगी, जिसे मामूली शुल्क देकर डाउनलोड किया जा सकेगा।

करोड़ों कागजात हो चुके हैं सुरक्षित, अब बिचौलियों का खेल होगा खत्म

गौरतलब है कि पिछले साल राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर जिला अभिलेखागारों के करोड़ों पुराने राजस्व दस्तावेजों को स्कैन कर डिजिटल किया था। हालांकि, डेटा बहुत बड़ा होने के कारण कुछ रिकॉर्ड ऑनलाइन दिखने से छूट गए थे, जिन्हें अब इस नई व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। सरकार के इस कदम से न सिर्फ आम जनता का समय और पैसा बचेगा, बल्कि अंचल कार्यालयों में सक्रिय दलालों और बिचौलियों का एकाधिकार भी पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

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