न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
अश्मित सिन्हा / पटना : बिहार के उच्च शिक्षा संस्थानों में लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरने की कवायद तेज हो गई है। राज्य में डिग्री कॉलेजों से लेकर विश्वविद्यालयों तक नियमित सहायक प्रोफेसरों की बड़े पैमाने पर नियुक्ति की तैयारी है।
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) के अनुसार, नियमित असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया सितंबर में शुरू की जाएगी। सरकार की ओर से रिक्त पदों का रोस्टर तैयार किया जा चुका है और आयोग भर्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा है। ऐसे में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए आने वाले महीनों में बड़ी भर्ती का रास्ता खुल सकता है।
राज्य के 211 डिग्री कॉलेजों में कुल 2,532 नियमित सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति की जाएगी। इन पदों को भरने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। आयोग के अनुसार, सितंबर में नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
इसके अलावा छह विषयों में दोबारा वैकेंसी निकाली जाएगी। इसका उद्देश्य पहले की भर्ती प्रक्रिया में खाली रह गए पदों को भरना है। इससे संबंधित विषयों के अभ्यर्थियों को एक और अवसर मिलने की संभावना है। सहायक प्रोफेसरों की भर्ती सिर्फ डिग्री कॉलेजों तक सीमित नहीं रहेगी। राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में भी करीब 7,000 सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति की तैयारी है।
आयोग के अध्यक्ष के अनुसार, कुलाधिपति के निर्देश पर नियमित नियुक्ति के लिए जरूरी स्टैच्यूट तैयार कर लिया गया है। इससे विश्वविद्यालयों में नियमित सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ है। नियमित सहायक प्रोफेसर की भर्ती में लिखित परीक्षा को अनिवार्य किया गया है। यानी अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा के चरण से गुजरना होगा। इसके बाद निर्धारित नियमों के अनुसार आगे की चयन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
आयोग का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और मेरिट आधारित रखने पर जोर है। ऐसे में अभ्यर्थियों को संभावित भर्ती नोटिफिकेशन के साथ परीक्षा पैटर्न और पात्रता से जुड़ी आधिकारिक जानकारी पर नजर रखनी होगी।
