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दिवाली पर मिट्टी के दीयों की बढ़ी मांग, कुम्हारों के चेहरों पर लौटी मुस्कान



दीपों का महापर्व दीपावली नजदीक आते ही बिहार के नवादा में बाजारों की रौनक बढ़ गई है।

न्यूज11 भारत/पटना डेस्क: दीपों का महापर्व दीपावली नजदीक आते ही बिहार के नवादा में बाजारों की रौनक बढ़ गई है। इस बार मिट्टी के दीयों की अच्छी बिक्री होने से कुम्हारों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही है। वर्षों से मिट्टी के दीये बनाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले कुम्हारों के लिए दीपावली एक खास अवसर लेकर आई है। बाजारों में लोग बड़ी संख्या में मिट्टी के दीये खरीदते नजर आ रहे हैं। इससे पारंपरिक मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने वाले कारीगरों में उत्साह देखने को मिल रहा है।

दीपावली के मौके पर बाजार में रंग-बिरंगे दीयों के साथ अलग-अलग आकार और डिजाइन के मिट्टी के दीये उपलब्ध हैं। लोग अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार दीयों की खरीदारी कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार चाइनीज लाइटों और कृत्रिम सजावटी सामान के बजाय मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता देने की बात लोग कह रहे हैं। लोगों का मानना है कि दीपावली का असली महत्व मिट्टी के दीये जलाने और अपनी परंपरा को निभाने में है।

खरीदारी करने पहुंचे लोगों का कहना है कि दीपावली हमारी संस्कृति और आस्था से जुड़ा पर्व है। ऐसे में घरों में मिट्टी के दीये जलाने से त्योहार की पारंपरिक पहचान बनी रहती है। साथ ही स्थानीय कुम्हारों की मेहनत को भी प्रोत्साहन मिलता है। लोगों का यह भी मानना है कि स्वदेशी सामान को बढ़ावा देना चाहिए और स्थानीय कारीगरों से खरीदारी करनी चाहिए।

वहीं, दीये बेचने वाले कुम्हारों का कहना है कि इस बार बिक्री अच्छी हो रही है। ग्राहक लगातार बाजार पहुंच रहे हैं और मिट्टी के दीयों की खरीदारी कर रहे हैं। दुकानदारों के मुताबिक बिक्री में कोई खास कमी नहीं है। इससे कुम्हार परिवारों को आर्थिक रूप से भी राहत मिल रही है।

कुल मिलाकर, नवादा में इस दीपावली मिट्टी के दीयों की चमक बाजारों में दिखाई दे रही है। लोगों की खरीदारी ने कुम्हारों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है। यह सिर्फ दीयों की बिक्री नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, परंपरा और स्थानीय कारीगरों के हुनर को सम्मान देने की एक खूबसूरत तस्वीर भी पेश कर रही है।

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